Harivansh Puran (34) [Hindi] Author:Ashok Kumar Gaur कैसे कुछ फूल दिन में
Yard notes & kiln story
Description
Harivansh Puran (34) [Hindi] Author:Ashok Kumar Gaur कैसे कुछ फूल दिन में कैसे कुछ फूल दिन में अपनी पंखुड़ियों को खोल देते हैं तथा रात को समेट लेते हैं । मार्गदर्शन के लिए उसने आकाश को देखा व उसका अध्ययन किया। शीघ्र ही उसने राशिचक्र व मानव के बीच संबंधों का अध्ययन किया। जैसे जैसे उसने आकाश के अध्ययन में कदम बढ़ाए तो पाया कि असंख्य अकाशीय पिंडो की गति के पीछे निश्चित व्यवस्था है जिसके द्वारा उसकी गति को समझा जा सकता है। उसने जाना कि ग्रह नियमबद्ध रूप से आकाश में गति करते हैं तथा पृथ्वी और उसके जीवन पर इनका प्रभाव पड़ता है। वह जानने लगा कि कब ज्वार भाटा से समुद्र का जल उठे गिरेगा और कब उसके परिवेश में समयानुसार परिवर्तन होकर वसंत मेहता और ए राधिका राव ने अपनी इस पुस्तक में उपलब्द करवाया हैं। हिन्दू ज्योतिष की इन तकनीकी क्रो बार बार लागूकरकै इनकी खूबसुंती